प्रयागराज / गाज़ियाबाद।इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सोमवार को दो महत्वपूर्ण मुद्दों पर सुनवाई करते हुए बड़ा फैसला सुनाया। पहला मामला हैबियस कॉर्पस रिट याचिका संख्या 696/2025 से जुड़ा था, जबकि दूसरा मामला वेव सिटी के खिलाफ किसानों द्वारा किए जा रहे धरना-प्रदर्शन से संबंधित था।
हैबियस कॉर्पस याचिका खारिज, हिरासत नहीं पाई अवैध
खंडपीठ न्यायमूर्ति सलिल कुमार राय एवं न्यायमूर्ति जफीर अहमद ने स्पष्ट किया कि गिरफ्तारी और रिहाई की प्रक्रिया पूरी तरह कानूनी थी।
राज्य सरकार के हलफनामे के अनुसार, याचिकाकर्ता प्रमोद दाबस को 03 अगस्त 2025 को गिरफ्तार कर उसी दिन मजिस्ट्रेट के समक्ष पेश कर दासना जेल भेजा गया था।
06 अगस्त 2025 को उन्हें बॉन्ड सत्यापन के बिना रिहा कर दिया गया।
अदालत ने कहा कि प्रस्तुत तथ्यों से यह स्पष्ट है कि हिरासत अवैध नहीं है। खंडपीठ ने टिप्पणी की—
अभ्यर्थी की गिरफ्तारी और रिहाई कानून के अनुरूप हुई है, अतः हैबियस कॉर्पस याचिका पोषणीय नहीं है।
इस आधार पर याचिका को खारिज कर दिया गया।
वेव सिटी धरना मामले में भी याचिका निरस्त, किसानों की मांग खारिज
इसी क्रम में हाईकोर्ट ने वेव सिटी के खिलाफ किसानों द्वारा चलाए जा रहे अवैध धरना-प्रदर्शन के विरोध में दायर याचिका को भी निरस्त कर दिया।
गौरतलब है कि किसान 20 मई 2014 के समझौते को लागू करने की मांग को लेकर 15 मार्च 2025 से धरना दे रहे थे। किसानों ने 57 मीटर चौड़ी सड़क को अतिक्रमित कर लिया था, जिससे यातायात, एम्बुलेंस और स्कूल वाहनों को दिक्कत हो रही थी।
शिकायत पर सहायक पुलिस आयुक्त मोदीनगर ज्ञान प्रकाश राय ने 25 जून 2025 को आदेश जारी किया, जिसमें किसानों को 3 दिन में धरना हटाने को कहा गया था। आदेश का पालन न होने पर 03 अगस्त 2025 को पुलिस ने कार्रवाई कर धरना स्थल खाली कराया और कुछ किसानों को गिरफ्तार कर 06 अगस्त को बेल पर रिहा किया।
इस कार्रवाई के खिलाफ प्रमोद दाबस द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने 25 अगस्त 2025 को कहा कि याचिकाकर्ता के आरोप निराधार हैं और यह धरना-प्रदर्शन अवैध प्रतीत होता है।
अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि किसानों की 8% भूखंड देने की मांग अब लागू नहीं हो सकती, क्योंकि समझौते की समय सीमा समाप्त हो चुकी है।
अदालत ने याचिका को पोषणीय न होने के कारण खारिज कर दिया।
फिलहाल धरना स्थल पर पुलिस बल की कड़ी निगरानी है और प्रशासन ने चेतावनी दी है कि किसी भी उपद्रव की स्थिति में सख्त कार्रवाई की जाएगी।