(आजाद सैय्यद सं)
गाजियाबाद (डासना)।
डासना के कुरैशियां मोहल्ले में स्थित मरहूम नईम कुरैशी का मशहूर “बिरयानी ठेला” आज भी लोगों के दिलों में वही पुराना स्वाद और अपनापन बनाए हुए है। लगभग 30 से 35 सालों से यह ठेला लोगों की सेवा कर रहा है और अब यह ठेला आजाद स्कूल के पास पंचायत घर पर लगता है, जहां रोजाना शाम को बिरयानी के शौकीनों की भीड़ उमड़ पड़ती है।
यह ठेला पहले मेन मार्केट डासना में लगता था, बाद में इब्राहिम चारपाई वालों के पास बड़े पेड़ के नीचे लगा और अब स्थायी रूप से पंचायत घर के पास लोगों की पसंद का ठिकाना बन चुका है।
नईम कुरैशी के पिता सम्मन कुरैशी ने इस ठेले की शुरुआत की थी। धीरे-धीरे जब बिरयानी के स्वाद की चर्चा दूर-दूर तक फैलने लगी तो नईम कुरैशी ने भी अपने पिता का साथ संभाला। लोगों के दिलों में उनकी बिरयानी का ऐसा स्वाद बस गया कि हर शाम “नईम बिरयानी वाले” का नाम ज़ुबां पर आ जाता था।
लोग बताते हैं कि जब कोई पहली बार ठेले पर जाता था, तो ठेले के ऊपर लिखी एक पट्टी सबका ध्यान खींच लेती थी —
“चांद की तारीफ तो सितारों से पूछो, बिरयानी की तारीफ खाने वालों से पूछो!”
यह पंक्ति जैसे इस ठेले की पहचान बन गई थी।
अब यह ठेला सिर्फ डासना ही नहीं, बल्कि दिल्ली, गजरौला, हापुड़, जाफराबाद, नोएडा जैसे इलाकों से आने वाले ग्राहकों के लिए भी स्वाद का केंद्र बन चुका है।
नईम कुरैशी के छोटे भाई वसीम कुरैशी बताते हैं —
करीब 30 साल से यह ठेला लग रहा है। लोग दूर-दराज से फोन कर बिरयानी मंगवाते हैं। हमारी कोशिश रहती है कि उन्हें हमेशा ताजी और खुशबूदार बिरयानी मिले।”
वहीं, मोहम्मद मुजम्मिल जो पिछले 12 वर्षों से इस ठेले पर कबाब बनाते हैं, कहते हैं —
हमारी बिरयानी और कबाब दोनों ही लोगों को बेहद पसंद आते हैं। जब तक बर्तन खाली नहीं हो जाते, ठेला नहीं बंद होता।”
नईम बिरयानी वाला ठेला अब केवल एक ठेला नहीं, बल्कि डासना की पहचान बन चुका है — जहां स्वाद, परंपरा और अपनापन एक साथ मिलता है।