टूटी सड़कों पर उभरी जनता की आवाज, पूर्व विधायक असलम चौधरी ने बच्चों संग उठाई गुहार

Date: 2025-08-05
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गाजियाबाद/ढ़बारसी.
ढबारसी गांव की बदहाल सड़कों और डंपिंग ग्राउंड के कारण फैलते प्रदूषण को लेकर अब पूर्व विधायक असलम चौधरी ने मोर्चा संभाल लिया है. स्कूली बच्चों को साथ लेकर वे स्वयं सड़क पर उतर आए और जिलाधिकारी गाजियाबाद से हाथ जोड़कर रास्ता सुधारने की गुहार लगाई. सोशल मीडिया पर उनका वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें वे बच्चों के साथ खड़े होकर भावुक अपील करते दिखाई दे रहे हैं – “हमें बचाइए, डंपर और बरसात ने रास्ता तबाह कर दिया है.”

 क्या है मामला?
गांव ढबारसी की सड़कों की हालत इतनी खराब हो चुकी है कि गहरे गड्ढों और कीचड़ में फिसलकर रोजाना बच्चे घायल हो रहे हैं. बरसात के मौसम में स्थिति और भी भयावह हो गई है. साथ ही, पास ही स्थित डंपिंग ग्राउंड से उठती दुर्गंध, मच्छर, बीमारियां और लगातार बढ़ती सड़क दुर्घटनाएं ग्रामीणों को जीना मुहाल कर चुकी हैं.

पूर्व विधायक असलम चौधरी ने तीन प्रमुख मांगें जिलाधिकारी से रखी हैं:
 टूटी हुई सड़क की तत्काल मरम्मत की जाए.
 डंपिंग ग्राउंड से फैल रहे संक्रमण पर रोक लगे.
 डंपर वाहनों की आवाजाही पर निगरानी एवं सख्त नियंत्रण लागू हो.
 सवाल भी खड़े हो रहे हैं:
पूर्व विधायक असलम चौधरी की यह सक्रियता जहां जनता की पीड़ा को उजागर कर रही है, वहीं यह राजनीतिक आलोचनाओं से अछूती नहीं है.
स्थानीय लोगों का कहना है कि जब असलम चौधरी खुद विधायक थे, तब इस सड़क की हालत सुधारने के लिए क्या कदम उठाए?
इसी तरह, वर्तमान ग्राम प्रधान और विधायक की निष्क्रियता भी अब सवालों के घेरे में है.

 जनता का दर्द:
ग्रामीणों का कहना है कि इस रास्ते की बदहाली के कारण अब कोई रिश्तेदार शादी-ब्याह के लिए गांव तक आने को तैयार नहीं होता. लोग रास्ते की हालत देखकर ही लौट जाते हैं.
विवाह, त्योहार, या अन्य पारिवारिक आयोजनों के लिए गाड़ियां गांव तक नहीं पहुंच पातीं – आधी डूब जाती हैं और बाकी कीचड़ में फँस जाती हैं.

 डंपर बनाम जनता:
नगर निगम और खनन से जुड़े डंपर इस रास्ते को बुरी तरह रौंद रहे हैं.
गांव के लोग भी खुद खनन कर डंपर चला रहे हैं, जिससे सड़क का और अधिक नुकसान हो रहा है.
ग्रामीणों की मांग है. कि इन सभी डंपरों पर तत्काल रोक लगे और सड़क को मजबूत सामग्री से दोबारा बनाया जाए, क्योंकि इसी रास्ते से कई मस्जिद, स्कूल और मुख्य मार्ग जुड़े हैं.

 चुनावी मौसम की हलचल:
इस मुद्दे पर चर्चा सिर्फ सड़क या डंपिंग ग्राउंड तक सीमित नहीं रही — गांव के लोग साफ तौर पर कह रहे हैं कि अब जब जिला पंचायत चुनाव नजदीक हैं, तभी नेताओं को गांव की हालत याद आ रही है.
असलम चौधरी के वीडियो को लेकर चर्चा है कि यह एक तरफ आमजन की पीड़ा की आवाज़ है, तो दूसरी तरफ राजनीतिक जमीन मजबूत करने की कोशिश भी.
अब निगाहें जिलाधिकारी गाजियाबाद पर टिकी हैं — क्या वे जनता की इस गुहार पर कार्रवाई करेंगे या यह भी एक और "चुनावी शोर" बनकर रह जाएगा?

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