अयोध्या में राम मंदिर ट्रस्ट के सदस्य परमानंद गिरी के एक लग्जरी Toyota Vellfire वाहन में पहुंचने का वीडियो और तस्वीरें सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही हैं.इसके बाद वाहन की कीमत और उसके वित्तीय स्रोत को लेकर विभिन्न तरह के दावे और चर्चाएं शुरू हो गई हैं.

सोशल मीडिया पर कुछ यूजर्स का कहना है कि यदि यह वाहन किसी श्रद्धालु द्वारा व्यक्तिगत रूप से दान किया गया है.तो इस पर किसी प्रकार की आपत्ति नहीं होनी चाहिए.वहीं कुछ अन्य लोग सवाल उठा रहे हैं कि यदि वाहन ट्रस्ट के धन से खरीदा गया है.तो इस संबंध में पारदर्शिता होनी चाहिए और इसकी आधिकारिक जानकारी सार्वजनिक की जानी चाहिए.
हालांकि, अब तक ऐसी कोई आधिकारिक पुष्टि उपलब्ध नहीं है कि यह वाहन किसके स्वामित्व में है.इसे किसने खरीदा है या इसके लिए धन का स्रोत क्या है.न ही श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट और न ही परमानंद गिरी की ओर से इस विषय पर कोई आधिकारिक बयान जारी किया गया है.

विशेषज्ञों का मानना है कि सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे दावों के आधार पर किसी निष्कर्ष पर पहुंचना उचित नहीं होगा। किसी भी वित्तीय अनियमितता या ट्रस्ट के धन के उपयोग से जुड़े आरोपों की पुष्टि केवल आधिकारिक दस्तावेजों या संबंधित संस्थाओं के बयान के आधार पर ही की जा सकती है.
फिलहाल यह मामला सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बना हुआ है.यदि भविष्य में ट्रस्ट या संबंधित पक्ष की ओर से कोई आधिकारिक स्पष्टीकरण जारी किया जाता है.तो उससे पूरे मामले की स्थिति स्पष्ट हो सकेगी. तब तक इस संबंध में किए जा रहे दावों को सत्यापित नहीं माना जा सकता.