पिछले 12 वर्षों में भारत ने अंतरराष्ट्रीय मंचों पर अपनी एक नई और मजबूत पहचान स्थापित की है. विदेश नीति. रणनीतिक साझेदारी.आर्थिक सहयोग और वैश्विक नेतृत्व के क्षेत्र में भारत की भूमिका लगातार बढ़ी है.‘India First’ की नीति को केंद्र में रखते हुए देश ने अपने राष्ट्रीय हितों को प्राथमिकता देने के साथ-साथ वैश्विक मुद्दों पर भी प्रभावी भागीदारी दर्ज कराई है.

विशेषज्ञों का मानना है कि इस अवधि में भारत ने पड़ोसी देशों के साथ संबंधों को मजबूत करने.वैश्विक मंचों पर अपनी उपस्थिति बढ़ाने और अंतरराष्ट्रीय सहयोग को नई दिशा देने का प्रयास किया है। G20 की अध्यक्षता के दौरान भारत ने विकासशील देशों की आवाज को प्रमुखता से उठाया और वैश्विक चुनौतियों पर साझा समाधान की आवश्यकता पर जोर दिया.

इसके अलावा रक्षा, व्यापार, तकनीक, ऊर्जा और डिजिटल क्षेत्र में कई देशों के साथ भारत के संबंधों में उल्लेखनीय विस्तार देखने को मिला। विभिन्न अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत की सक्रिय भूमिका ने देश की प्रतिष्ठा और प्रभाव को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने में योगदान दिया है.
विदेश नीति के जानकारों का कहना है कि भारत आज वैश्विक राजनीति.आर्थिक विकास और रणनीतिक सहयोग के महत्वपूर्ण केंद्रों में से एक बनकर उभरा है. यही कारण है कि दुनिया के प्रमुख देशों के साथ भारत के संबंध लगातार मजबूत होते जा रहे हैं.

आने वाले वर्षों में भी भारत की वैश्विक भूमिका और प्रभाव बढ़ने की उम्मीद जताई जा रही है. विशेष रूप से व्यापार.तकनीक. जलवायु परिवर्तन और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा जैसे विषयों पर.