राम मंदिर निर्माण कार्य से जुड़े एक इंजीनियर दीनानाथ वर्मा ने गंभीर आरोप लगाते हुए दावा किया है कि परियोजना के दौरान उनसे 40 प्रतिशत कमीशन की मांग की गई थी। उनका कहना है कि जब उन्होंने इस कथित मांग का विरोध किया और संबंधित मामले की शिकायत की, तो उन्हें कार्य से हटा दिया गया.
दीनानाथ वर्मा का यह भी आरोप है कि शिकायत दर्ज कराने के बाद उन्हें विभिन्न प्रकार की धमकियां दी गईं. उनके इन आरोपों के सामने आने के बाद मामला चर्चा का विषय बन गया है और कई लोगों ने निष्पक्ष जांच की मांग उठाई है.
हालांकि, समाचार लिखे जाने तक संबंधित संस्थाओं या अधिकारियों की ओर से इन आरोपों पर कोई विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई थी। आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है.
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इस प्रकार के आरोप लगाए गए हैं तो मामले की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच आवश्यक है ताकि सच्चाई सामने आ सके। वहीं दूसरी ओर, किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले जांच एजेंसियों और संबंधित पक्षों की आधिकारिक रिपोर्ट का इंतजार किया जाना चाहिए.
फिलहाल यह मामला आरोप और प्रत्यारोप के दौर में है तथा आगे की जांच और आधिकारिक प्रतिक्रियाओं पर सभी की नजर बनी हुई है.